Mere Ram - मेरे प्रभु श्रीराम — राम का जीवन-माहात्म्य
।। ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।। आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि, क्षम्यतां परमेश्वरि॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि। यत् पूजितं मया देवि, परिपूर्णं तदस्तु मे॥ श्रीराम केवल मर्यादा-पुरुषोत्तम राजा या आदर्श मानव ही नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी जीवन-दृष्टि हैं जो मनुष्य को हर परिस्थिति में संतुलन, धैर्य और धर्म का मार्ग दिखाती है। उनके चरित्र में ऐसी सरलता और ऊँचाई है कि जीवन में कभी न कभी व्यक्ति उनसे प्रेरित अवश्य होता है और कहीं न कहीं उनके आदर्शों को अपनाने का प्रयास करता है। राम एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई, आदर्श जामाता और एक आदर्श राजा के रूप में हमारे सामने आते हैं। उनके जीवन का संदेश केवल इतिहास या कथा नहीं, बल्कि आचरण का मार्ग है। यही कारण है कि “राम” नाम का स्मरण भी लोगों को मानसिक शक्ति और संतुलन देता है। श्रीहनुमान जी की अपार शक्ति और समर्पण का मूल भी श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति ही है। कुछ समय से आत्ममंथन चल रहा था कि जीवन की भागदौड़ और कठिन समय में मन को किस दिशा में लगाया जाए। कई बार लिखन...